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आरक्षण पर दलितों के घुटने टेकने को मजबूर हुए मोदी

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प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट और मोदी सरकार भले ही SC/ST के खिलाफ नजर आ रही हो … पर सरकार में शामिल कई ऐसी पार्टियाँ है जो दलितों की हितैषी है ….जिसकी वजह से मोदी सरकार अब SC/ST के आगे घुटने टेकने को मजबूर होती नजर आ रही है. आपको बता दें की केंद्र में भाजपा की सहयोगी लोजपा …. जिसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संसद में इसका जोरदार विरोध किया था. उसी पार्टी ने अब अपनी ही सरकार से अध्यादेश लाने की मांग कर दी है.

दरअसल पूर्व लोजपा अध्यक्ष और लोजपा केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए ….नौकरियों में आरक्षण पर उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले में ‘सुधार’ के लिए सरकार को एक अध्यादेश लाना चाहिए . साथ ही उन्होंने यह भी कहा की इस तरह के सभी मुद्दों को संविधान की ‘‘नौवीं अनुसूची’’ में डाल देना चाहिए ताकि उन्हें ‘न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखा जा सके’. पासवान ने आगे कहा की सरकार उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक पुनर्विचार याचिका दायर करने ….और इस विषय पर कानूनी राय लेने पर विचार कर रही है. हालाँकि उन्होंने आशंका जाहिर की हो सकता है सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले से पीछे नहीं हटे. उन्होंने कहा की सरकार के पास पुनर्विचार याचिका का विकल्प है लेकिन यह देखना होगा कि वहां हम सफल होते हैं या नहीं. इसकी वजह से लोजपा नेता ने आगे की रणनीति पर से पर्दा उठाते हुए कहा की मेरे विचार से सबसे आसान तरीका एक अध्यादेश जारी करना और संविधान में संशोधन करना होगा. वहीँ पासवान ने एससी/एसटी से जुड़े इस तरह के सभी विषयों को नौवीं अनुसूची में डालने की मांग पर जोर डालते हुए कहा की …. इसके बाद एससी/एसटी को अदालत जाने से छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि राज्य विधानसभाएं और संसद एससी/एसटी अधिकारों पर कानून तो पारित कर रही हैं लेकिन वे कानूनी लड़ाई में उलझ कर रह जा रही हैं. उन्होंने बताया कि करीब 70 दलित और आदिवासी सांसद इस हफ्ते की शुरुआत में उनके आवास पर मिले थे…और उनमें केंद्रीय मंत्री भी थे. वहीँ पासवान ने लोगों को भरोसा दिलाया की देश में आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा और इसके लिए सरकार को जो कदम उठाना होगा, वह सरकार उठाएगी.
इस तरह SC/ST के आरक्षण को लेकर खुद सरकार से जुड़े लोग ही मोदी की नब्ज दबा रहे हैं….जिसकी वजह से अब मोदी सरकार के पास दो ही चारा रह गया है या तो सरकार अध्यादेश लाकर कोर्ट के फैसले को बदले …जैसा सरकार SC/ST Act में पहले भी कर चुकी है…या फिर कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाले . सीधे शब्दों में कहें तो लोजपा के विरोध के बाद मोदी सरकार को मजबूर होकर आरक्षण पर कोई बड़ा फैसला लेना होगा वरना ….मोदी सल्तनत को समाप्त होते देर नहीं लगेगा.

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