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क्या Congress में एक नए युग की होगी शुरुआत ? – By RR

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लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद शायद राहुल गाँधी को यह एहसास हो गया है की….पार्टी को गाँधी परिवार के छाया से बाहर निकलने की जरुरत है. इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी नेताओ को यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने इस्तीफे के फैसले से पीछे नहीं हटेंगे….और उन पर इस्तीफा वापस ना लेने के लिए दबाव ना डाला जाये , कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सूत्रों के मुताबिक राहुल ने साफ कर दिया कि वह पार्टी अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहते. इसलिए उनका रिप्लेसमेंट खोज लिया जाए….और नया अध्यक्ष कोई नॉन गांधी होना चाहिये. राहुल गांधी ने कांग्रेस नेताओं से प्रियंका गांधी के नाम पर भी विचार नही करने को कहा है. दरअसल राहुल गांधी की नाराजगी इस बात को लेकर है की….उनके प्रचार अभियान के दौरान सीनियर नेता खामोशी से बैठे रहे या भितरघात करते रहे… और उन्होंने पार्टी को चुनाव जिताने में मदद नहीं की. सही मायनों में राहुल की नाराज़गी नवनिर्वाचित मुख्यमंत्रियों कमलनाथ और अशोक गहलोत के अलावा एक दर्जन सीनियर कांग्रेस नेताओं से है. राहुल गांधी इस बात से भी नाराज हैं कि तमाम प्रदेशों के कांग्रेस अध्यक्ष…अपने करीबियों को टिकट दिलाने के लिए जोड़-तोड़ करते रहे, और पार्टी के लिए जितना मजबूती से प्रचार करना चाहिए था उतना नहीं किया . हालांकि, राहुल गांधी ने किसी का नाम नहीं किया, लेकिन कई वरिष्ठ नेताओं के बेटे और बेटियों को हार का सामना करना पड़ा. इनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत, कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी सुष्मिता देव शामिल हैं. वहीँ उनकी नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि जब पार्टी की करारी हार हुई तो भी किसी भी प्रदेश अध्यक्ष ने इस्तीफे का प्रस्ताव नहीं किया….जब उन्होंने इस्तीफे का प्रस्ताव किया उसके बाद ही प्रदेश अध्यक्षों ने इस्तीफ़े का प्रस्ताव किया. उधर राहुल गांधी ने अपनी सभी बैठकें और कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं. वह कांग्रेस पार्टी के किसी भी बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं… ना ही उन्होंने कोई बैठक बुलाई है , यहां तक कि पार्टी के जीते हुए सांसदों से भी राहुल गांधी ने अभी तक मुलाकात नहीं की है. वैसे तमाम सांसदों ने राहुल गांधी से मिलने के लिए अर्जी लगाई है लेकिन उनको कोई जवाब नहीं मिला है. हालाँकि कांग्रेस चार दिनों में अपनी कार्यसमिति की एक और बैठक आयोजित करने की योजना बना रही है. बैठक में राहुल गांधी को अंतिम बार मनाने की कोशिश की जाएगी, साथ ही वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जाएगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि सप्ताह भर से कांग्रेस नेता उन्हें मनाने में जुटे हैं लेकिन राहुल गांधी ने अपना मन नहीं बदला. अब देखना यह है की क्या कांग्रेस को सच में गाँधी परिवार से बाहर कोई अध्यक्ष मिलता है या नहीं.

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