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मायावती की रैलियों से बिहार में बदला सत्ता का समीकरण

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मायावती की रैलियों से बिहार में बदला सत्ता का समीकरण . जी हाँ जैसा कि हम जानते हैं कि मायावती दलितों की एक बड़ी नेता हैं और इस बार इन्होंने बिहार में उपेंद्र कुशवाहा और ओवैसी के साथ गठबंधन किया है. ऐसे में बिहार में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का एक बड़ा वोट बैंक मायावती के पाले में जाता दिख रहा है. हालांकि शुरू में लोगों को इस बात पर संदेह था कि मायावती की पार्टी या यूं कहें कि….. मायावती का गठबंधन बिहार विधानसभा चुनाव में कोई खास कमाल नहीं दिखा पाएगा. लेकिन जिस तरह से मायावती की रैली में भीड़ उमड़ी उसको देखते हुए ऐसा महसूस हो रहा है की ….. विधानसभा चुनावों में मायावती के कारण नीतीश कुमार सत्ता मुक्त होंगे. दरअसल मायावती की रैली से बिहार में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग एकजुट होते हुए नजर आ रहे हैं. खास कर इनकी रैली में इन समुदाय के लोगों की बहुत ज्यादा भीड़ देखने को मिली. ऐसे में एनडीए और महागठबंधन दोनों खेमों में काफी हलचल देखने को मिल रही है…… क्योंकि अब तक ये दोनों गठबंधन यही मानकर चल रहे थे इस बार चुनावी मुकाबला एनडीए और महागठबंधन में ही है. लेकिन मायावती की रैली से यह साफ हो गया कि बिहार में सत्ता का असली संघर्ष तो होना अभी बाकी है. खास बात यह है कि मायावती ने इस रैली में जहां एनडीए और राजद के 15-15 साल के शासन पर प्रहार किया…. वहीं उन्होंने राज्य में विकास कार्य का नया मॉडल भी पेश किया…..और जनता उनके इस मॉडल की बात सुनकर काफी प्रभावित भी नजर आयी. वहीं बसपा सुप्रीमो ने आरक्षण के मुद्दे पर भी NDA सरकार को बेनकाब कर दिया. बसपा सुप्रीमो ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर दलित और पिछड़ों के आरक्षण पर डाका डालने का काम कर रही है .मायावती ने कहा कि जो आरक्षण का लाभ पिछड़े तथा आदिवासियों व दलितों को मिल रहा था…..उसको वर्तमान सरकार सोची समझी रणनीति के तहत धीरे धीरे समाप्त कर रही है. उन्होंने कहा की स्थिति यह है कि आरक्षण पर डाका डालने के साथ-साथ सरकारी काम भी प्राइवेट लोग कर रहे हैं….इससे लोगों को आरक्षण का लाभ कम मिल पा रहा है. मायावती ने कहा की बिहार में अल्पसंख्यक समुदाय की हालत भी कुछ ठीक नहीं है…..और यहाँ गरीबी, बेरोजगारी भी काफी बढ़ गयी है. उन्होंने कहा कि 15 साल लालू तथा 15 साल नीतीश को सरकार चलाने का मौका मिला, लेकिन लोगों को स्थानीय और स्थायी रोजगार नहीं मिला. इस तरह भारी जनसमर्थन के बीच मायावती ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ लालू राज को भी पूरी तरीके से बेनकाब कर दिया कि ……कैसे पिछले 30 वर्षों से बिहार की जनता बदहाली में जी रही है. बड़ी बात यह है कि जिस तरह से राज्य की मायावती के पक्ष में हवा बहती हुई नजर आ रही है ….उसको देखते हुए राज्य में बसपा गठबंधन की जीत तय नजर आ रही है. ऐसे में अब लोगों को 10 नवंबर का इंतजार रहेगा जिस दिन बिहार में बसपा इतिहास रच सकती है.

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