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मायावती ने दलितों और साधू-संतों के मुद्दे पर भाजपा का किया पर्दाफाश

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देश या राज्यों में भाजपा राज हो या फिर कांग्रेस राज …. इनके राज में दलितों और पिछड़ों की स्थिति इतनी ज्यादा बुरी हुई है कि ….. अब दलित और पिछड़े समाज के लोग सत्ता में भाजपा या कांग्रेस को नहीं ….बल्कि बसपा जैसी दलितों की पार्टी को सत्ता में देखना चाहते हैं . वैसे एक सच्चाई यह भी है कि भाजपा और कांग्रेस के राज में सिर्फ दलित और पिछड़ों की ही नहीं बल्कि सवर्णों की जिंदगी भी नरक हो गयी है. हालाँकि सवर्ण जाति के लोगों को भाजपा का वोट बैंक कहा जाता है …..लेकिन UP के गोंडा में एक पुजारी के साथ जो हुआ …..और जिस तरह से इस मुद्दे पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार मौन है. उससे ऐसा महसूस हो रहा है कि भाजपा को दलितों या सवर्णों से नहीं बल्कि सिर्फ सत्ता से मतलब है…. जिसकी वजह से मायावती में भाजपा के खिलाफ जोरदार हमला बोला. दरअसल राजस्थान के करौली और उत्तर प्रदेश में बागपात के बाद गोंडा जिले में एक पुजारी पर हमला हुआ है. गोंडा में राम जानकी मंदिर के पुजारी को रात में गोली मार दी गई. डॉक्टरों ने घायल स्थिति में उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया है. वहीँ इससे पहले करौली में पुजारी को जिंदा जला दिया गया था ……जबकि बागपत में नदी में साधु की लाश मिलने का मामला सामने आया था. हालाँकि पुजारी को जलाने या मारने पर सबसे पहले भाजपा और RSS को आवाज उठाना चाहिए था….लेकिन सत्ता के मद में चूर इनके जगह इस मुद्दे को मायावती ने जोर-शोर से उठाया है. आपको बता दें की मायावती ने कहा की राजस्थान की तरह यूपी के गोंडा जिले में…. मन्दिर के पुजारी पर भू-माफियाओं द्वारा मन्दिर की जमीन पर कब्जा करने के इरादे से….. किया गया जानलेवा हमला अति-शर्मनाक है. मायावती ने कहा की सन्त की सरकार में अब सन्त भी सुरक्षित नहीं. उन्होंने कहा की इससे खराब कानून-व्यवस्था की स्थिति और क्या हो सकती है. वैसे यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में सवर्णों पर हमला हुआ और सरकार मौन होकर देखती रही. जैसा की हम जानते हैं की 2019 में जब भाजपा नेता कमलेश तिवारी की हत्या हुई थी…तो उस वक्त भी मायावती ने ही दलगत राजनीति से ऊपर उठाकर तिवारी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया था. वहीँ हाल में राजस्थान में जब एक पुजारी को जिंदा जलाया गया तो….भाजपा और कांग्रेस दोनों का ध्यान राजनीति करने पर था …..लेकिन मायावती ने पुजारी और उनके परिवार के लिए आवाज उठाया . इसकी वजह से राजनीतिक जानकारों का यह कहना है की …..मायावती पर कोई आरोप नहीं लगा सकता कि वह सिर्फ दलितों की राजनीति करती हैं…..लेकिन भाजपा जिसका इस वक्त केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों जगह शासन है . वहीं लोगों के अनुसार साधु-संत समाज के लोग ज्यादातर भाजपा को ही अपना समर्थन देते हैं …ऐसे में अगर भाजपा शासन में साधु-संतों की ही हत्या होने लगे और सरकार इस पर कोई भी कार्यवाही करने से बचते हुए नजर आए…… तो इससे यह साफ पता चलता है की भाजपा दलितों और पिछड़ों के तरह सवर्णों का भी सिर्फ इस्तेमाल कर रही है. इसलिए मायावती ने दलितों और पिछड़ों के साथ-साथ सवर्णों को भी आगाह किया है की वे भाजपा से सावधान रहें . कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं की मायावती ने भाजपा का पर्दाफाश कर दिया है की ….पार्टी सिर्फ दलितों और पिछड़ों की नहीं बल्कि सवर्णों की भी विरोधी है…..इसलिए दलितों और सवर्णों को मिलकर देश और प्रदेश को भाजपा मुक्त करने के लिए एकजुट होने की जरुरत है…क्योंकि तभी दलितों और पिछड़ों के साथ सवर्णों की जिन्दगी भी सुरक्षित रहेगी .

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