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राजरत्न-मायावती पहुंचे करीब अब भाजपा होगी गरीब

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राजरत्न अंबेडकर ने पिछले कुछ वर्षों में दलितों के हक़ में ऐसे-ऐसे काम को अंजाम दिया है की …. उससे एक तरह जहाँ दलितों के दिल में उनके लिए सम्मान बढ़ गया है….वहीं भाजपा ने अब मायावती के बाद राजरत्न अंबेडकर से भी डरना शुरू कर दिया है. खैर राजरत्न अंबेडकर सक्रीय राजनीति से काफी दूर हैं. इसलिए भाजपा को संसद में राजरत्न से कोई चुनौती नहीं मिल रही ….. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं हुआ की भाजपा राजरत्न अंबेडकर को लेकर निश्चिंत हो गयी है. वैसे राजरतन अंबेडकर ने इन दिनों भाजपा भगाओ से ज्यादा RSS भगाओ पर जोर दे रखा है. जिसकी वजह से राजरत्न अंबेडकर अब सपनों में भी RSS के नेताओं को आकर डराते रहते हैं. लेकिन सवाल यह उठता है की आखिर राजरतन अंबेडकर किस तरह देश से भाजपा का पूर्ण सफाया कर सकते हैं. हालाँकि राजरत्न अंबेडकर की क्षमता पर किसी को शक नहीं है ….लेकिन किसी राजनीतिक पार्टी को चुनावों में जोरदार पटखनी देने के लिए जनता के सामने कोई और राजनीतिक विकल्प जरुरी है. ऐसी स्थिति में राजरत्न अंबेडकर के लिए यह जरुरी है की वो या तो खुद किसी राजनीतिक पार्टी का निर्माण करें या फिर किसी ऐसे पार्टी को join कर लें जो दलितों और पिछड़ों की हितैषी हो. देखें तो राजरत्न अंबेडकर इस वक्त अपनी पार्टी बनाने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं तो भाजपा को मुंहतोड़ जबाब देने के लिए उन्हें किसी पार्टी में शामिल होना पड़ेगा…..और सही मायने में उनके लिए बसपा से बेहतर कोई दूसरा विकल्प हो ही नहीं सकता…..क्यूंकि सिर्फ बसपा ही एक ऐसी पार्टी है जो दलितों और पिछड़ों के लिए समर्पित है. यानि की राजरत्न अंबेडकर अगर मायावती से जाकर मिल जाएँ तो फिर उत्तर प्रदेश में एक ऐसा समीकरण तैयार होगा ….जो निश्चित रूप से दलितों और पिछड़ों के सभी सवालों का जबाब होगा. सीधे शब्दों में कहें तो राजरत्न अंबेडकर और मायावती अगर मिल जाएँ तो राज्य में भाजपा का सूपड़ा साफ हो सकता है. इसकी वजह यह है की जनता के नजरों में राजरतन अंबेडकर की छवि भाजपा और RSS विरोधी नेता की बन चुकी है. वहीँ राजरत्न अंबेडकर के वजह से ही जनता के मन में भरोसा हुआ है की वो एक दिन देश में EVM को बैन कराकर दम लेंगे……दूसरी ओर मायावती तो शुरू से ही भाजपा के लिए काल बनी हुयी हैं. इसका मतलब साफ है की मायावती और राजरतन अंबेडकर के सिद्धांत और इरादे बिल्कुल एक हैं. ऐसे में ये दोनों अगर एक हो जाते हैं तो इनके बीच मतभेद होने की संभावना नगण्य हो जाएगी. कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं की मायावती और राजरत्न अंबेडकर की एकता ही दिलायेगी लोगों को भाजपा से मुक्ति.

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