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राजस्थान Congress में बड़ी संकट, सरकार खतरे में – By RR

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लोकसभा चुनाव 2019 में कई राज्य ऐसे रहे जहाँ कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला. इससे कांग्रेस के अंदर कलह बढ़ गया. दरअसल राजस्थान में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने के बाद प्रदेश में फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है. सरकार के मंत्रियों की चुनावी हार पर सियासत के साथ ही…एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की गुटबाजी खुलकर सामने आई है. पार्टी का एक गुट प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ सियासी महौल बनाने में जुटा है. कहा जा रहा है कि यह गुट राहुल गांधी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. वहीँ प्रदेश कांग्रेस समित के सचिव सुशील असोपा ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने की मांग की. इस पोस्ट के सामने आने के बाद पार्टी में फूट के आसार और बढ़ गए हैं. असोपा ने अपनी पोस्ट में कहा कि अगर सचिन पायलट सीएम होते तो राज्य में लोकसभा के नतीजे बिल्कुल जुदा होते. उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि आप राजस्थान में कहीं पर भी जाएं, एक ही आवाज सुनाई देती है: अगर पायलट सीएम होते तो चुनावी नतीजे कुछ और होते. लोग कह रहे हैं कि पायलट के प्रयास की वजह से ही राज्य में कांग्रेस सत्ता में आई क्योंकि युवाओं को लग रहा था कि राज्य में उन्हें नेतृत्व का मौका मिलेगा.”” जैसा की हम जानते हैं की राजस्थान में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी मात दी थी. इसके बाद ऐसा लगने लगा था की राज्य में कांग्रेस लोकसभा चुनाव में जोरदार प्रदर्शन करेगी….पर हुआ इसका उल्टा… पार्टी का यहाँ खाता ही नहीं खुला. ऐसे में राज्य में कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई फिर सामने आ गयी है. जैसा हम जानते हैं की विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने पर गहलोत गुट और पायलट गुट अपने-अपने नेता को CM बनाने के लिए भीड़ गए थे. अब दोनों गुटों में फिर से भिड़ंत हो गयी है. सियासी हलकों में चर्चा में आया कृषि मंत्री लालचंद कटारिया का इस्तीफा इसी ओर इशारा करता है. सोशल मीडिया में वायरल इस इस्तीफे के साथ दावा किया जा रहा था कि …. मुख्यमंत्री गहलोत के जरिए इस्तीफा राज्यपाल को भेजा गया है. लेकिन कटारिया के इस्तीफे के पीछे सियासी मायने कुछ और ही निकाले जा रहे हैं. इसके जरिए कटारिया पर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ दबाव बनाने की बात कही जा रही है. कटारिया की ही भाषा में प्रदेश नेतृत्व को लेकर राहुल गांधी पर दबाव बनाने की कोशिशें कई और कांग्रेसी नेता कर रहे हैं. इनमें गहलोत के समर्थक बताए जा रहे सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने भी बयान दिया है. कहा जा रहा है कि उन्होंने भी आलाकमान से प्रदेश में गहलोत को ज्यादा ‘फ्री हैंड’ देने की मांग की है. ऐसे में राजस्थान के सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या गहलोत गुट के नेता या मंत्री चुनावी हार की आड़ में पायलट पर निशाना तो नहीं साध रहे हैं. हालांकि, सियासत गरमाने के बाद आंजना ने बयान दिया है कि, ‘मैंने किसी नेता के इस्तीफे की मांग नहीं की है. हां, कांग्रेस को आत्मचिंतन की जरुरत है. वैसे भी हम जानते हैं की राज्य में गहलोत और पायलट दोनों ही खासे लोकप्रिय है. पर इस हार का ठीकरा दोनों गुट एक दुसरे पर फोड़ रहे हैं. ऊपर से कई कांग्रेसी नेता भी इन दोनों नेताओं पर अलग-अलग बयान दे रहे हैं. इनकी लड़ाई देखकर यही लग रहा है की कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में हार का साइड इफ़ेक्ट राज्यों में भी भुगतना पड़ेगा.

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