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हाथरस कांड: अखिलेश-राजरत्न ने कहा RSS का हुआ पर्दाफाश

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हाथरस कांड पर देश की एक बड़ी आबादी भले ही एकजुट होकर दरिंदों को फांसी दिलाने के लिए तैयार है….लेकिन अभी तक किसी भी हिंदू संगठन ने इस पर बयान नहीं दिया है . ऐसे में सवाल यह उठता है आखिर क्यों. क्या RSS सहित तमाम हिंदू संगठन सिर्फ तभी आवाज उठाएंगे जब सवर्णों पर कोई अत्याचार होगा. क्या RSS, करनी सेना, बजरंग दल को मानवता के नाते ही सही कम से कम दरिंदों के खिलाफ बयान नहीं देना चाहिए था…जिससे जनता को भी यह एहसास होता कि हिंदू संगठन भी दरिंदगी का विरोध कर रही है. क्या इन संगठनों को यह एहसास नहीं है की पीड़िता दलित बाद में पहले वह एक लड़की है. इन्हीं वजहों से अब राजरत्न अंबेडकर और अखिलेश यादव ने RSS और भाजपा के खिलाफ मिलकर जोरदार हमला बोला है.
आपको बता दें की अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा और RSS दोनों का चरित्र संदिग्ध है…..और इनकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है. उन्होंने कहा की कहने को तो ये बड़े-बड़े वादे, मीठी-मीठी बातें करते हैं…..लेकिन हकीकत में झूठ और कुप्रचार ही दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि RSS सिर्फ दिखावे के लिए दलितों और पिछड़ों के लिए आवाज उठाने का नाटक करता है….. लेकिन सच्चाई यह है की उन्हें दलितों और पिछड़ों की कोई परवाह नहीं. उन्होंने कहा कि अगर उन्हें दलितों की परवाह होती तो हाथरस कांड पर RSS भी जोर शोर से आवाज उठाता. वहीं राजरत्न आंबेडकर ने भी हाथरस कांड पर RSS की चुप्पी पर जोरदार हमला बोला . उन्होंने कहा कि RSS दलितों को हिंदू मानता ही नहीं . राजरत्न ने कहा कि RSS के लिए तो दलित सिर्फ एक वोट बैंक है जो चुनावों के वक्त भाजपा को वोट देता है. राजरत्न ने कहा कि दलित विरोधी RSS और भाजपा का हाथरस कांड में पर्दाफाश हो गया है ….और यह साबित हो गया कि भाजपा और RSS एक ही सिक्के के दो पहलू है. इसलिए उन्होंने भारत में दलितों को आगाह किया है कि किसी भी कीमत पर RSS की बातों पर भरोसा ना करें. अंत में उन्होंने फिर दोहराया कि सच तो यह है कि RSS ही वह चक्की है जहां से भाजपा के तानाशाह नेताओं का जन्म होता है….इसलिए RSS को बैन कर देना चाहिए .
इस तरह अखिलेश यादव और राजरत्न अंबेडकर ने मिलकर भाजपा के साथ साथ RSS के खिलाफ भी जोरदार हमला बोला है…..की कैसे हाथरस कांड जैसे संगीन अपराध में भी संगठन ने एक तरह से खुलकर भाजपा का साथ दिया. उन्होंने साफ कहा कि अगर हाथरस कांड पर RSS सख्त होता तो फिर यह कहने की जरूरत नहीं कि ….भाजपा जोरशोर से दरिंदों को फांसी दिलाने में जुट जाती और पीड़िता को न्याय मिल चुका होता. कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं की अखिलेश यादव और राजरत्न अंबेडकर ने हाथरस कांड के मुद्दे पर भाजपा और RSS का पोल खोल दिया है की …..दोनों ही दलित विरोधी हैं और उन्होंने इस समाज का सिर्फ इस्तेमाल इस्तेमाल किया है.

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