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Mayawati की राह में EVM बना विलन – By RR

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लोकसभा चुनाव का फैसला भले ही मोदी के पक्ष में चला गया हो…पर मायावती के आरोपों का अभी भी कोई निराकरण नहीं निकला है. दरअसल मायावती ने चुनाव हारने पर आरोप लगाया था की यह मोदी की नहीं EVM की जीत है. सवाल यह उठता है की मायावती का आरोप क्या बिल्कुल निराधार है. अगर देखें तो सिर्फ मायावती ही नहीं कई दल के नेता बोल चुके हैं की चुनाव में भाजपा ने EVM में धांधली कर जीत हासिल की है. हालाँकि चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को नाकार दिया है. फिर भी आयोग ने अब तक कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दिया है…. जिससे की विपक्ष संतुष्ट हो. अगर मायावती का आरोप सही है तो फिर किसी भी सत्ताधारी दल को हराना नामुमकिन हो जाएगा…क्यूंकि जब चुनाव होगा सत्ताधारी दल EVM में इस तरह की सेटिंग कर देगी की बिना चुनाव लड़े ही जीत हो जाएगी. यहाँ गौर करने वाली बात यह भी है की कोई एक दल EVM पर ऊँगली उठाये तो इसे हार का बहाना समझा जा सकता है…पर जब विपक्ष के सभी दल ऊँगली उठा रहे हों तो फिर चुनाव आयोग को सामने आकर लोगों के संदेह को समाप्त करना चाहिए. वैसे भी सभी दल एक साथ झूठ नहीं बोल सकते. आपको बता दें की पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी EC को यह सन्देश देते नजर आये थे की…चुनाव की मर्यादा बनी रहनी चाहिए. आपको बता दें की ईवीएम से कथित छेड़छाड़ की ख़बरों के बीच पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने चुनाव आयोग से उसकी संस्थागत विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की अपील की थी. उन्होंने कहा था की कोई संस्था कैसे काम करती है, यह फैसला वहां काम करने वालों का होता है. इस मामले में संस्थागत विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर है. प्रणब मुखर्जी ने कहा था की चुनाव आयोग को जनता की सारी अटकलों पर विराम लगाना चाहिए. वैसे भी एक स्वस्थ लोकतंत्र वही होता है जहाँ साफ-सुथरे ढंग से चुनाव हो. ये तो सभी राजनीतिक दल जानते हैं की चुनाव में जीत एक ही दल की होती है…पर चुनाव में कोई दल धांधली से मिलने वाली हार बर्दाश्त नहीं कर सकती. इसी वजह से मायावती और उनके समर्थकों को यह लग रहा है की उन्हें छला गया है. मायावती तो अभी भी यह मानने को तैयार नहीं हैं की उनकी पार्टी को मात्र 10 सीटें मिली है, जबकि राज्य में उनका इतना बड़ा जनाधार है. खैर बसपा समर्थकों के अनुसार लोकसभा चुनाव 2019 तो EVM के भेंट चढ़ गया. पर आगे और भी चुनाव होने वाले हैं..जिसके लिए सभी दलों को अभी से ही एकजुट होना पड़ेगा. अगर EVM ही बसपा के राह में असली विलेन है तो… इसके लिए अभी से तैयार होना पड़ेगा. हालाँकि मायावती पूरी तरह से बसपा को जीताने के लिए तैयार दिख रही हैं….पर उन्हें समर्थकों के साथ बैठकर EVM का कोई तोड़ निकालने की जरुरत है और अगर जरुरत पड़े तो उन्हें EVM के खिलाफ आन्दोलन भी करना चाहिए और मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ की मायावती के समर्थक इस आन्दोलन में बहन जी का पूरा साथ देंगे… क्या आप इस आन्दोलन में मायावती का साथ देंगे ? आप अपनी हाँ या न हमे comments में लिख कर जरुर बताएं….

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