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Mayawati ने पूर्वांचल में Narendra Modi का वर्चस्व तोड़ा – By RR

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लोकसभा चुनाव 2019 में चली पीएम मोदी की सुनामी के बीच सबसे ज्यादा फायदा हुआ बसपा सुप्रीमो मायावती को. साल 2014 में अपनी सियासी जमीन गंवा चुकी मायावती की पार्टी इस बार दहाई सीटों के आंकड़े छूने जा रही है. हालाँकि कहा जाता है की देश की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर जाता है.. और यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है. इसी फॉर्मूले के जरिए बीजेपी 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद अब 2019 के चुनाव यूपी में सबसे ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही. पर अखिलेश यादव और मायावती हाथ मिलाने के बाद भले ही नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोक पाने में सफल नहीं रही , लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ पूर्वांचल में ही सपा-बसपा गठबंधन मजबूती रहा है. आपको बता दें की पूर्वांचल की 26 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 17 और दो सीटें उसकी सहयोगी अपना दल जीतने में कामयाब रही. जबकि बसपा को 6 और सपा को एक सीट मिली है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने इन 26 सीटों में से 25 पर जीत दर्ज की थी और एक सीट सपा को मिली थी. पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों की तुलना करें तो बीजेपी को सीधे तौर पर 6 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा है. जैसा हम जानते हैं की सपा-बसपा गठबंधन ने पूर्वांचल की सभी 26 सीटों में से 13-13 सीटों पर चुनाव लड़ा. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पूर्वांचल को साधने के लिए आजमगढ़ संसदीय सीट से मैदान में उतरे थे, लेकिन अपनी सीट के अलावा दूसरी सीट पर सपा को नहीं जिता सके हैं. पिछले चुनाव में पूर्वांचल में मोदी लहर की रफ्तार को कम करने के लिए सपा के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ सीट से मैदान में उतरे थे. लेकिन वह अपनी सीट के अलावा किसी दूसरी सीट पर साइकिल दौड़ाने में कामयाब नहीं हो सके. मुलायम की तर्ज पर ही अखिलेश यादव पूर्वांचल को साधने के लिए आजमगढ़ की जमीन पर ‘हाथी’ के सहारे उतरे थे. इसके बावजूद वो आजमगढ़ सीट के सिवाय किसी दूसरी सीट पर प्रभाव नहीं दिखा सके हैं. जबकि हाथी साईकिल के सहारे मोदी-योगी के दुर्ग को भेदने में काफी हद तक सफल रहा है. मिली जानकारी के अनुसार पूर्वांचल की श्रावस्ती, घोसी, लालगंज, गाजीपुर, जौनपुर और अंबेडकर नगर लोकसभा सीट पर बसपा जीतने में कामयाब रही है. इसके अलावा मक्ष्लीशहर लोकसभा सीट बसपा महज 181 वोट से हार गई. यही नहीं इसके अलावा कई और ऐसी सीटें हैं, जहां गठबंधन को बहुत कम अंतर से हार मिली है. वैसे तो पूर्वांचल ब्राह्मणों का मजबूत गढ़ माना जाता है…. और पूर्वांचल की अधिकतर सीटों पर ब्राह्मण वोटरों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. पर इस इलाके में बसपा ने दलित, मुस्लिम और यादव समीकरण के जरिए आधे दर्जन सीटों पर जीत का परचम लहराया है. कुल मिलाकर मोदी के सुनामी में भी पूर्वांचल का परिणाम मायावती के लिए संतोषजनक रहा.

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