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Mayawati में सत्ता की भूख नही, जनता की सेवा धर्म – By RR

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चुनाव में जीत या हार से भले ही कुछ नेता खुद को ताकतवर या कमजोर समझते हों. पर भारत के एक नेता ऐसे भी हैं. जिनका कद चुनाव में हार या जीत का मोहताज नहीं है. यह हमेशा से अपनी छवि के कारण ताकतवर ही रही हैं. दरअसल हम चर्चा करने जा रहे हैं दलितों के मसीहा मायावती का. मायावती का राजनीतिक कद कभी भी चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद भी नहीं घटा. तभी तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इनके सामने घुटने टेकते नजर आई.. वहीँ मोदी भी भरे मंच से मायावती का तारीफ करने से नहीं चुके. सच्चाई तो यह है की कुछ नेताओं की ताकत का अंदाजा चुनाव में उनके जीत-हार से decide होता है… परन्तु मायावती के असली ताकत है जनता का भरोसा….और दलितों का प्यार. अगर गौर से सोचें तो मायावती ने राजनीति में कदम रखते ही दलितों पर ऐसा जादू कर दिया की…..दलित उन्हें अपना मसीहा समझने लगे….और एक बार जिसे मसीहा की उपाधि मिल जाती है….उसे फिर खुद से ज्यादा दूसरों का ख्याल रखना पड़ता है. मायावती ने भी यही किया…उन्होंने राजनीति में कदम रखते ही सिर्फ दलितों का सोचा. अगर बसपा सुप्रीमो चाहती तो वो भी अपना घर बसा सकती थी….और आज उनके संतान भी राजनीति में उनका मदद करते नजर आ सकते थे. पर उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए अपनी जिन्दगी कुर्बान कर दी…..अब वो सभी दलितों को अपना संतान मानती हैं. दरअसल मायावती के इसी एक फैसले ने उनका कद सिर्फ दलितों के बीच नहीं….बल्कि अन्य जाति के लोगों के बीच बढ़ गया. हालाँकि देश में कई राजनेता और भी हैं जिन्होंने देश के लिए खुद का घर नहीं बसाया….पर मायावती की बात ही कुछ और है. दरअसल यह जिस समुदाय से आती हैं….पहले के ज़माने में उस समुदाय में लड़कियों से काफी भेद भाव किया जाता था. एक तरफ जहाँ लड़कों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहन मिलता था….तो लड़कियों को सिर्फ घर तक सिमित रखा जाता था. ऐसे में मायावती का रुढ़िवादी परम्पराओं को तोड़कर आगे निकलना तारीफ के काबिल है. वैसे मायावती ने शुरू से ही जनता के दिलों पर राज किया है. चाहें कैसी भी परिस्थिति आई इन्होने जनता का साथ नहीं छोड़ा. शायद यही वजह है की जनता ने भी इनका साथ कभी नहीं छोड़ा. अगर मौजूदा चुनाव की ही बात करें तो हर किसी को पता था की देश में मोदी लहर है…और चुनाव में मोदी को विकास कार्यों के साथ-साथ पाकिस्तान पर airstrike का भी साथ मिल रहा है. इसके बाद भी इन्होने UP में सपा-बसपा के वोटबैंक को अपने दम पर एकजुट किया. यह मायावती और जनता के प्यार के बीच गठबंधन का ही नतीजा है की….ताकतवर भाजपा UP में पिछली सफ़लता को नहीं दोहरा पायी. भले ही लोकसभा चुनाव में भाजपा को जीत मिल रही हो…पर यह कहीं से भी मायावती की हार नहीं है. अगर मोदी के सुनामी में भी मायावती गठबंधन के वजूद को बचाने में कामयाब रही तो….इससे साबित होता है की जनता के बीच मायावती के प्यार में कोई कटौती नहीं हुयी है…..और हम कह सकते हैं की बसपा सुप्रीमो की असली ताकत जनता का भरोसा और प्यार है|

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