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Modi Government Jolts Punjab Chief Minister Captain Amarinder Singh

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मोदी सरकार ने साल 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. अब इस लक्ष्य को हासिल करने में तीन साल बचे हैं. इस बीच पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़ा झटका दिया है.

आपको बता दे की मोदी सरकार ने देश में बढ़ रहे खेती संकट को हल करने और किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए चार दिन पहले एक उच्‍चस्‍तरीय कमेटी बनाई है. इस कमेटी से पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को इससे बाहर रखा है. वैसे तो पंजाब को भारत का अन्न का कटोरा कहा जाता है. इसकी सारी अर्थव्यवस्था खेती पर निर्भर है. ऐसे में पंजाब के सीएम को इस कोर ग्रुप से बाहर रखे जाने पर विशेषज्ञों ने हैरानी जताई है. हालाँकि विशेषेज्ञों का कहना है कि ऐसा लग रहा है यह हाई पावर्ड कमेटी पूरी तरह से सियासी कमेटी है. आइए जानते है पूरी जानकारी विस्तार से .दरअसल,कमेटी के चेयरमैन महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडऩवीस होंगे. यह कमेटी नीति में बदलाव, निवेश को आकर्षित करने और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ाने संबंधी अपने सुझाव देगी. और कमेटी में कर्नाटक, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं.

इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और नीति आयोग के मेंबर रमेश चंद्र भी इस कमेटी के सदस्य होंगे. जबकि कमेटी को दो महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. यह कमेटी आवश्यक वस्तु अधिनियम का भी निरीक्षण करेगा, ताकि खेती की मार्केटिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निजी निवेश को भी बढ़ावा दिया जा सके.आपकी जानकारी के लिए बता दे कि राज्‍य के कृषि विशेषज्ञों व जानकारों का कहना है कि पंजाब में खेती संकट इस कद्र बढ़ चुका है कि हर रोज दो से तीन किसान व खेतिहर मजदूर आत्महत्या कर रहे हैं.

वैसे में राज्य सरकार की कर्ज माफी योजना भी इनको ऐसा करने से रोक नहीं पा रही है.बता दे की मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसानों की कर्ज माफी में सहयोग करने की मांग कर चुके हैं, हालांकि केंद्र की ओर से अभी तक इसमें कोई सहयोग नहीं मिला है. बजट में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस ओर कोई सहयोग की बात नहीं की. यही नहीं उन्होंने खेती संकट को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री को कई और सुझाव भी दिए थे, जिसमें सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने को सुनिश्चित करने के बारे में कहा गया था. जैसे की पंजाब किसान आयोग के चेयरमैन अजयवीर जाखड़ ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री को इस कोर कमेटी से बाहर रखने पर हैरानी जताई है. उन्होंने कहा कि जब भी खेती में बदलाव की बात होती है, तो देश की नजरें पंजाब पर रहती हैं.

इतनी महत्वपूर्ण कमेटी में पंजाब की ही अवहेलना कर दी गई है. पहले एक बैठक में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मल सीतारमण ने हम सभी को सुझाव के लिए बुलाया था, हमने जितने भी सवाल उठाए तो उन्होंने कुछ सुझावों के बारे में कह दिया कि इसका फैसला मुख्यमंत्रियों की मीटिंग में हो चुका है. कुछ सुझावों के बारे में कह दिया कि इस पर नीति आयोग काम कर रहा है. अब मुख्यमंत्रियों की कमेटी में पंजाब को शामिल ही नहीं किया, तो पंजाब अपना केस कहां रखे.वैसे ,किसान देश की जीवन रेखा हैं और किसी भी देश का विकास उसके कृषि क्षेत्र के विकास के बिना अधूरा है .

देश की खाद्य सुरक्षा को सतत आधार पर सुनिश्‍चित करने का श्रेय हमारे किसानों को ही जाता है.आज वस्तुस्तिथि यह है कि भारत न केवल बहुत से कृषि उत्‍पादों में आत्‍म निर्भर व् आत्म संपन्न है वरन बहुत से उत्‍पादों का निर्यातक भी है इन सत्यो के साथ यह भी सच है कि किसान अपने उत्‍पादों का लाभकारी मूल्‍य नहीं पाते हैं.

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