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As NCP Self Destructs, Shivsena Rejoice- By RR

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महाराष्ट्र में शिवसेना को दोहरी ख़ुशी हाथ लगी है. जी हाँ एक तरफ शिवसेना ने लोकसभा चुनावों में जोरदार सफलता हासिल की है…वहीँ दूसरी ओर पार्टी ने एनसीपी में सेंध लगा दी है. आज की चर्चा इसी पर. जैसा की हम जानते हैं की शिवसेना-भाजपा ने मिलकर महाराष्ट्र से कांग्रेस-एनसीपी का सूपड़ा साफ कर दिया है. अभी इस सदमे से एनसीपी उबरी भी नहीं थी की … ख़बरें आने लगी की महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री जयदत्त उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए.शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शिव बंधन के प्रतीक स्वरूप एक लाल धागा बांध कर तथा पार्टी का एक छोटा झंडा भेंट कर उनका पार्टी में स्वागत किया. दरअसल ये पहले एनसीपी में थे…पर इन्होने पवार की पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. आपको बता दें की मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड जिले के रहने वाले क्षीरसागर ने बताया है कि …उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने एनसीपी नेतृत्व पर उन्हें नजरअंदाज करने और विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे को अधिक महत्व देने का आरोप लगाते हुए असंतोष व्यक्त किया. मुंडे भी बीड इलाके से ही आते हैं और दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं.लोकसभा चुनाव के दौरान क्षीरसागर ने बीड से बीजेपी उम्मीदवार प्रीतम मुंडे को समर्थन दिया था. क्षीरसागर ने कहा की एनसीपी में मुझे घुटन महसूस हो रही थी….इसलिए मैंने विधानसभा की सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया है. उन्होंने कहा की मुझे लगता है कि मैं शिवसेना के साथ स्वतंत्रता से काम कर पाऊंगा और इस वजह से ही में पार्टी शामिल हो रहा हूं. जयदत्त क्षीरसागर हाल ही में शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से उनके निवास मतोश्री पर मिलने पहुंचे थे. यह एनसीपी के लिए बड़े झटके के तरह है क्यूंकि बीड़ जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में जयदत्त अकेले राकांपा विधायक थे. बता दें कि पिछले दिनों प्रियंका शर्मा कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हुई थीं. उन्होंने भी नाराजगी के चलते पार्टी छोड़ी थी… उस वक्त वह पार्टी की प्रवक्ता के तौर पर काम कर रही थीं. वैसे एनसीपी शायद जयदत्त क्षीरसागर का पार्टी छोड़ कर जाना पचा भी ले….पर लोक सभा चुनाव में मिली बड़ी हार शरद पवार भूल नहीं पाएंगे. एक समय था की शरद पवार PM बनने के सपने देख रहे थे…वहीँ कई बार तो वह मायावती,राहुल गाँधी को PM बनाने की बात कह रहे थे. पर स्थिति यह हुयी की वह न ही किंग बने और न किंगमेकर. चाह कर भी शरद पवार के पास हार का मातम मनाने के अलावे कोई और चारा नहीं है. वैसे इस हार से एक बात और साबित हो रही है की….शरद पवार का एनसीपी पर पकड़ और कमजोर होता जा रहा है. अगर आगे भी यही स्थिति कायम रही तो…शरद पवार के पास न विधानसभा चुनाव जीतने वाले नेता होंगे और न लोकसभा चुनाव जीतने वाले. वैसे शिवसेना की इस दोहरी जीत पर शिवसैनिकों का उत्साह देखते ही बन रहा है. ऐसा लग रहा है मानों वो वक़्त दूर नहीं जब हर राज्य के हर विधानसभा क्षेत्र में भगवा लहराएगा.

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