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Shivsena ने बढाई BJP और सबकी धड़कन – By RR

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इस चुनाव में राफेल से ज्यादा चर्चा में रहा शिवसेना–भाजपा की दोस्ती . जैसा हम जानते हैं की काफी कड़वाहट के बाद भाजपा-शिवसेना लोकसभा चुनाव में फिर एक हो गए थे. और अब यह दिख रहा है की ये दोस्ती लम्बा टिकेगी. पर आज हमारी चर्चा का केंद्र इनकी दोस्ती नहीं बल्कि शिवसेना का वो बयान है… जिसने कई विरोधियों को चौंका दिया है. आपको बता दें की पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में लिखा है की मोदी सरकार दोबारा चुनकर आयेगी, ऐसा कहने के लिये अब राजनीतिक पंडितों की कोई आवश्यकता नहीं है. शिवसेना ने कहा की जमीनी हालत ऐसी थी कि लोग मोदी को सत्ता में लाने के लिये अपना मन बना चुके थे. वहीं मराठी दैनिक ने दावा किया की महाराष्ट्र में शिवसेना-भाजपा गठबंधन ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा. जैसा की हम जानते हैं की अधिकतर एक्जिट पोल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के एक और कार्यकाल का पूर्वानुमान जताया है. कुछ एक्जिट पोल में भाजपा नीत राजग को 300 से अधिक सीटें मिलने का अनुमान जताया तो कुछ लोकसभा में भाजपा को भी आराम से 272 का बहुमत का आंकड़ा पार करते बता रहे हैं. इस पर शिवसेना ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार दोबारा सत्ता में आयेगी क्योंकि एक्जिट पोल के नतीजे भाजपा नेतृत्व वाले राजग के पक्ष में स्पष्ट रूझान दिखा रहे हैं. वहीँ शिवसेना ने इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन एवं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की कड़ी मेहनत की तारीफ की और कहा कि नई लोकसभा में उनकी पार्टी को विपक्ष के नेता पद के लिये पर्याप्त सीटें मिल जायेंगी. अगर शिवसेना का बयान देखें तो यह अपने आप में चौंकाने वाली बात है की…पार्टी ने अपने धुर विरोधी कांग्रेस की प्रशंशा की है. हालाँकि शिवसेना ने हुंकार भर दिया है की इस बार देश में मोदी सरकार को आने से कोई नहीं रोक सकता. इसके लिए किसी भी राजनीतिक पंडित की आवश्यकता नहीं है. वैसे इस चुनाव को लेकर अभी-अभी मेरे मन में एक ख्याल आया है….की आखिर क्या मौजूदा चुनाव में राष्ट्रवाद और हिंदुत्व सभी पर भारी पड़ गया. क्यूंकि रमजान में भी कोई दल मुस्लिमों को रिझाने के लिए कोई बात कहते हुए ज्यादा दिखाई नहीं पड़े. भाजपा-शिवसेना तो वैसे भी हिंदुत्व को एजेंडे को लेकर कई वर्षों से चल रही है… पर इस बार कांग्रेस-एनसीपी भी मुस्लिमों से बचते नजर आये. भले ही इस चुनाव में ज्यादतर मुस्लिम विपक्षी दलों के साथ खड़े दिख रहे हैं…पर राजनीतिक दल अब सिर्फ एक नाव की सवारी नहीं करना चाह रहे हैं. खासकर कांग्रेस भी अब सॉफ्ट हिन्दुत्व को अपनाते नजर आ रही है. इसका लाभ उन्हें चुनाव में मिला भी है. एग्जिट पोल के अनुसार महाराष्ट्र में लगभग 51 % हिन्दुओं का वोट भाजपा को गया है… पर कांग्रेस भी हिन्दुओं के 31 % वोट पाने में कामयाब दिख रही है. हालांकि भाजपा को पीछे करना अभी कांग्रेस के वश में नहीं दिख रहा है. ऐसा लग रह है की इस चुनाव में विपक्ष ने जो भी रणनीति बनायी थी….वो भाजपा की रणनीति के आगे कमजोर पड़ गयी है. वैसे शिवसेना का कांग्रेस को शाबाशी देना चर्चा का विषय बना रहेगा.

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